सूरज का एक चक्कर

कैसे हो बाबा?
हाँ, पता है, जो बाबा हो उसे कैसी दिक्कत।
एक साल हो गए तुम्हारे बिना.. सूरज का एक पूरा चक्कर लगा लिया है। एक साल में मैं जैसे दस साल बड़ा हो गया हूँ, अब कोई प्यार से बिगाड़ने वाला नहीं है ना। डरो मत, समझदार अभी भी नहीं हुआ। तुम तो बस बाजार में चीज़ें भूल आते थे मैं याद हीं नहीं रखता।
तुम्हारे पौधे अच्छे हैं, माँ पानी देती रहती.. तुम्हारे इंसान मुझे समझ नहीं आते। बच्चे सारे बढ़िया हैं, तुम्हें उतना याद तो नहीं करते और करे भी क्यों सारी कहानियां तो बस मुझे और दीदी को सुनाई थीं। हमारे बाद वालों को तो हर समय पढ़ाई के लिए बोलते रहते थे बस। हाँ – हाँ याद है, तुम्हारे बाद ये काम मेरा है। उन्हें किताबें भेजता हूँ पर कुछ बोल नहीं पाता, तुम्हारी तरह दिन भर खुद पढ़ता तो नहीं ना।
तुम्हारे साथ घण्टों बैठ कर गप मारने वाले सेल्समेन नहीं आते अब कॉलोनी में, कोई उनकी चीज़ें खरीदता ही नहीं। खरीदे भी क्यों, कोई ब्रांड ही नहीं होता उनका.. अब लोग उनके घर जाने के पैसे के बारे में सोच कर बेकार समान तो नहीं लेंगे ना। आइस क्रीम वाला भी कभी कभी सामने से जाते समय एक बार बालकनी की ओर देखता है शायद इस उम्मीद से कि कोई कुछ खरीद ले, पर बिना मौसम के कौन आइसक्रीम खाए भला। हमसे तो वो बोल भी नहीं पाता कि आज बिक्री अच्छी नहीं हुई, उसे पता है ये बात बस बाबा समझ सकते हैं।
तुम्हारी किताबें अलमारी में बंद हैं, तुम्हारी 11 वाकिंग स्टिक्स एक साल से वेंटिलेटर का सहारा ले कर खड़ी हैं। तुम्हारा घर में गुम हुआ सेना का सातवां मैडल और आचार्य का सर्टिफिकेट अभी तक नहीं ढूंढ पाया कोई.. हाँ पता है कोई मन से नहीं ढूंढता, अब तो शायद कोई ढूंढता भी नहीं।
तुमने कहा था गुस्सा छोड़ दो, तुम्हारे बाद कोई बचा हीं नहीं जिस पर गुस्सा कर सकूँ। बाकी तो सब समझदार हैं, न कोई सड़क के अनजान लोगों को चाय पर बुलाता, न सर्दी गर्मी बरसात में बाहर बालकनी में बीमार होने को बैठता, न सर्दी होने पर आइस क्रीम खाता और ना हीं किसी राहगीर को उधार देता, एक तुम हीं थे नालायक अब तुम भी इतनी दूर हो कि यहाँ से डाँट नहीं सकता।
पर ये मत समझना तुमसे नाराज़ नहीं हूँ, मुझे इतना कुछ सिखाए बिना चलते बने| न तो मैं पंचांग देख सकता हूँ, न धोती पहन सकता कभी कोई मजदूर अपनी बेटी की शादी के लिए दिन पूछने आए तो क्या बताऊंगा और बनारस के घाट पर पोंगा पण्डित कैसे बनूँगा? अपने जादू वाले मंत्र तंत्र भी नहीं बताए, कभी पैसे कम हुए तो कहां से आएंगे, काली जी की किताब भी नहीं मेरे पास तो।
नहीं मेरे गर्दन की हड्डी नहीं दिख रही, अभी भी तुम्हारी आँखों का भ्रम है। मजे में खाता हूँ, अब तो गधों की तरह सोता भी हूँ। हाँ अब भी काम समय पर नहीं करता, छुट्टी के दिन नहाता भी नहीं। क्या कहा? काम करने वालों की कोई छुट्टी नहीं होती? कितनी बार बताऊँ, आराम करने वाले लोग भी होने चाहिये, सब तुम्हारी तरह हो गए तो तुम बाबा कैसे बने रहोगे। नहीं, तुम्हारी जगह नहीं लेनी मुझे, तुम्हारी सारी किताबें भी नहीं पढ़नी, तुम्हरा पुस्तकालय भी नहीं बनाना, इतना बड़ा नहीं हो सकता मैं।
तुम बाबा बने रहो और मैं बबुआ.. बाकी कोई कमी नहीं।
अच्छा चलता हूँ, सूरज के और भी चक्कर लगाने।
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Serenity

I want to see you.. as God made you, in his image, beautiful, pure and divine
I want to hear you.. like babies squealing in joy of dreams only they can design
I want to touch you.. the way an artist’s brush touches the canvas, tracing the curves in his mind
I want to know you.. the way trees know spring, ready to bloom, ready to leave winter behind
I want to see you, as you always deserve to be.. shining with a smile of the hope you always remind

(Not) Always

We don’t always have to run

And climb the mountain top.

There are beautiful flowers

And brooks where one can stop.

We don’t always have to speak

And claim our victory.

There’s a voice which speaks in silence,

And it sets you free.

We don’t always have to know

Where the future leads.

We’re exactly where we need to be,

We’ve everything we need.

We don’t always have to think

And keep piling out thoughts.

We may think they are important

But we know that they are not.

Simple is the way of nature,

Simple nature’s call.

Sit beneath a tree sometime

And you will get it all.

बँटवारा

जब छोटा था बाबा ने सिखाया था बाँटना
एक लाई के चार हिस्से
और सिखाया था, देने वाला लेता है आखिरी हिस्सा
नहीं सोचता अपने बारे में

मैं करता था लाई के चार हिस्से
और बाँटता था सबको
लेता था सबसे छोटा टुकडा
फ़िर बाबा दे देते थे मुझे अपना हिस्सा भी

बाबा करते थे अपने हिस्से
बाँट देते थे सब कुछ हमें
आखिरी हिस्सा भी
नहीं रखते थे कुछ भी

सालों तक मोतियाबिंद का आपरेशन नहीं कराया
गिन कर उतरते थे सीढ़ियाँ
आँखों की रोशनी तक बाँट दी
कभी कुछ ना लिया

बाबा दूरदर्शी थे, शायद जानते थे
एक दिन मैँ भी आऊँगा उनकी जगह
करुँगा अपने हिस्से
और याद करुँगा उन्हें

माँ का, पिताजी का
बहनों का, भाईयों का
और उस लडकी का
जिसने कभी अपना हिस्सा माँगा हीं नहीं

दे दिया मुझे अपना हिस्सा
जैसे बाबा देते थे
नहीं रखा कुछ भी
बस वहीं उधार का हिस्सा अब मेरा अपना है

Meditation

I sit upon the floor

My spine almost erect

I close my eyes and try

To see the landscape

A lake covered with mist

The water still and calm

There is no human trace

No hurry, no traffic jam

For now the world is perfect

The balance is restored

No one needs anything

And no hunger anymore

There is no looming war

No tricks going around

No one being exploited

The perfect place’s been found

Now I open my eyes

To nuances I can’t miss

I’ll come back to you again

Thank you for this small bliss.

अक्षर

बाबा ने सिखाया था पहला अक्षर

और बताया था अ-क्षर का अर्थ

कहा था अनंत तक जाता है हर अक्षर

अनंत तक जाते हैं उनसे बने शब्द और विचार

एक अक्षर में छुपा है ब्रम्हांड का रहस्य

एक अक्षर की साधना में हीं है समस्त सार

 

बाबा अनंत में विलीन हुए

छोड़ गए अपना अक्षर मेरे लिये

पर मैं तो निरा मूर्ख, देखता हूँ बस आकार

करता हूँ प्रतीक्षा उस अनंत क्षण का

जब कोई अक्षर देगा मुझे अपना स्वरूप

और मेरे विचार पाएंगे व्योम में विस्तार

 

अनंत तक जाते हैं अक्षर

अनंत तक जाते हैं उनसे बने शब्द और विचार

A Lemonade on a hotSaturday Afternoon

Incessant chain of thoughts
The useless prelude
Your living’s a tragedy
Your dying’s a muse

You’ve got to pretend
and keep smiling along
You’ve got to get things
your list should be long

You’ve got to be famous
Not necessarily right
Your enemy eludes you
You still have to fight

Your battles hypocritical
Your weapons decoy
The field is all set
And you will be destroyed

The monthly installment
of life Will be paid
You already know enough
Everything has been said

So laugh when you’re living
And laugh when you’re dead
It’s not that hard anyway
They’ve brought you a lemonade

Purposeless Song

The trees are made to stand and watch

The leaves made to fall

The rivers made to flow and sing

Across the mountains tall

 

Humans made to roam around

And keep alive the flame

Out of which the supreme lord

The nameless gives us name

 

The senses made to keep us wild

The body made to rust

Untill the day we leave it all

And turn into the dust

 

The food made to keep us weak

So that we don’t escape

The labyrinth we wander in

The decoy landscape

 

Beauty made to keep us fixed

While every atom’s spinning

We’re losing it as seasons change

Just fools to think we’re winning

 

The multitudes to give us hint

That everything is same

We run around bewildered

And it’s part of this old game

 

We’ll learn the rules, we’ll play the game

We’ll break them to have fun

And then we’ll leave the playing field

To merge and become one

I’m not running the show

I’m at rage again

at this utter chaos in things.

Everything looks out of order.

I grew stronger,

I assumed I can run the show,

but I never stopped seeing you

in all your multitudes of existence.

I saw you in life.

Even more so in death.

And I know it is you who drives me

through the hills and valleys.

You know when exactly to sink me

and when to pull me out,

I can figure the patterns now.

It has always been you,

running this grand opera,

and it’s been a hell of a show.

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